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Ritual Games

खेल की सम्पूर्ण जानकारी

सामग्री विहीन सामूहिक लोक खेल

  उदभव काल से वर्तमान काल तक न जाने लोक संस्कृति में कितने लोक खेलों की परम्परा विकसित हुई और कितनी लुप्त हो गईं कहा नहीं जा सकता है। घर में, घर के बहार में, चौपाल में , खुले मैदान में, जल और पेड़ों में अनेक लोक खेल आज भी मिलते हैं । सभी खेल किसी न किसी बिंदु पर आधारित होते हैं जैसे-ऋतु पर, जल में तथा सामग्री पर। लोक खेलों के प्रेमियों व निर्माताओं ने छोटी से छोटी व व्यर्थ वस्तुओं को खेल का भी आधार बनाया है। जिसमें चूड़ी के टुकड़े,बिल्लस, पूक, पेड़ के गिरे हुए पत्ते प्रमुख हैं। इसी तरह कठिन वस्तुओं को भी खेल के रूप में विकसित किया है जैसे गिल्ली, भौरा व चौसर। जिस तरह अनेकानेक लोक खेलों में सामग्री को महत्त्व दिया गया है। उसी तरह ऐसे खेल भी हमें दिए गए हैं जिनमे किसी भी तरह की सामग्री नहीं होती। खेल परम्परा के चलते आज भी ऐसे खेल संरक्षित है ।

 

सामग्री विहीन सामूहिक लोक खेल निम्न लिखित हैं :-
१. रेसटीप, २. सियाम-सुलुलुलू, ३. टेकन, ४. सोना-चांदी, ५. परी-पखरा, ६. घाम -छाँव, ७. अटकन-मटकन, ८. संखली , ९. डंडी - पौहा, १०. बघुवा, ११. इल्लर-डिल्ल्लर, १२. गोल-गोल रानी, १३. जांवर-जीयर, १४. लंगरची, १५. नदी-पहार,

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